गुरुवार, 8 सितंबर 2016

प्रातः वंदना~

नमन*नमन*नमन

इस धरती से उस नीले अम्बर  तक 

आंगन  से  बागों की  फुलवारी  तक

खेतों की लहलहाती हरियाली   तक

बुड़ों  से  बच्चो की किलकारी   तक

मंदिर  से  मस्जिद की मीनारों   तक

रिश्तेदारों की प्यारी रिश्तेदारी तक

दुनियाँ  की सारी  दुनियादारी   तक

सभी   धर्मों    के  धर्माधिकारी  तक

कश्मीर   से     कन्याकुमारी     तक

             रहे ;~

Ω अमन Ω चमन Ω अमन Ω चमन Ω
~~~~>मनीष गौतम 'मनु'
दिनांक -०८/०९/२०१६

सुप्रभात मित्रों -
आने वाला 'पल' और 'कल' मंगलमयी हो ।

मंगलवार, 6 सितंबर 2016

जिन्दगी दर्द बनते जा रही ~

रिश्तों    के   बिच    अब   सिलवटें।

दुर्भावना     अब    बड़ते  जा   रही ॥

संकीर्ण मानसिकता के आधार तले ।

दृष्टिकोण,दूरदर्शिता,दृष्टिदोष  हुईं ॥

संबंधों  में  भी  अब  खुदगर्जी   पन ।   

आशाएँ   अपेक्षाएँ    ही    सर्वोपरी ॥     

किसी     अपेक्षा  की   उपेक्षा   से  ।   

अपनों  में  ही वैमनस्यता दिख रही ॥      

न  दिन  को  चैन  न   रात   सुकून ।            

हर पल   अब  अधिकार  की  पड़ी ॥  

'हम'  नहीं अब 'मैं' की हुई  भावना ।

इनसानियत   विखंडित    हो   रही ॥        

'मै'  नहीं  'हम' से समाज   बना   है ।

जिना    है   तो  समाज  को   बना ॥   

'हम'   जिन्दा हैं  समाज  के  सहारे ।           

जिन्दा    नहीं    हम   समाज बिना ॥

एकल   नहीं  हम  संयुक्त   बनकर ।           

हर    मुश्किल   को   आसान  करें ॥

जो जिन्दगी दर्द में डूबी  दिखती  है । 

उस  जिन्दगी  को उदीयमान  करें ॥              

दर्द  कहीं नहीं दिल ही  तो  बेदर्द  है ।

इसीलिये  जिवन में  दर्दे  ही दर्द  है ॥

       ~~~~~>मनीष गौतम 'मनु'

दिनांक -०७/०९/२०१६
शुभ संध्या मित्रों ~
आनेवाला 'पल' और 'कल' मंगलमयी हो।


विनायक से विनय ~

हे   बुद्धि  के  दाता  विघ्न  विनाशक
ज्ञान   हम  सब   जनों   को   दीजिए

कश्मीर    से     कन्याकुमारी    तक
गोवा  से    बंगाल   की   खाड़ी  तक

भारत एक  है और एक ही रहेगा ऐसा
दुनियाँ  को   कहने  लगा  ही  दीजिए

अभिव्यक्ति   की  स्वतंत्रता  से  नीत
कश्मीर   पर   बड़बोलापन   हो  रहा

कश्मीर  रोज रो रहा आतंक नाच रहा
आतंक को अपना तांडव दिखा दीजिए

बुद्धि के  दाता  हे  गजानन हे गणपति
अब  मेरी  अरजी  स्विकार  कीजिए ॥

॥गौरीलाल  गणेश  भगवान  की जय ॥
       ~~~~~>मनीष गौतम 'मनु'
दिनांक -०७/०९/२०१६

सुप्रभात मित्रों ~
आने वाला 'पल' और 'कल' मंगलमयी हो 

सोमवार, 5 सितंबर 2016

संयोग/सौभाग्य /समर्पण

गुरु गोविन्द  दोउ खड़े, काके लागू पाय  ।
बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय ॥

मित्रों संयोग से  शिक्षक दिवस और गणेशचतुर्थी । का महान पर्व आज एक ही दिन आया है । मित्रों दोनों पर्वो के विषय में हम कुछ खास -खास बातें जानते ही है ।

आईये हम दोनों पर्व की बतायीं गई भावनाओं को आत्मसात करें  और अपने और अपने परिवार के साथ संस्कृति और देश-समाज का भविष्य उज्जवल करने अपना योगदान देवें ।

क्योंकि हमसे मिलकर समाज बना है ।मगर हम जिन्दा है समाज के सहारे यदि हमें जिन्दा रहना है तो हमें समाज को जिन्दा रखना होंगा वर्ना । मनुष्यों का पतन निश्चित है । 

खैर,आज सौभाग्यशाली अवसर पर आप सभी मित्रों को सभी देशज जन को शिक्षक दिवस और गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ  ।
शुभ संध्या मित्रों ~
आनेवाला 'पल' और 'कल' मंगलमयी हो ।

रविवार, 4 सितंबर 2016

हर हर महादेव -

आज मेरे घर विराजमान हुए भोलेनाथ ।
तीज (हरितालिका व्रत ) हमारी स्थानीय भाषा में 'काजल तीजा' महान धार्मिक पर्व पर आप सभी मित्रों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।
उमापति महादेव की जय ।
                   हर हर महादेव ॥
शुभ संध्या मित्रों -
आनेवाला 'पल' और 'कल' मंगलमयी हो ।

शुक्रवार, 2 सितंबर 2016

सुमन

ये फूल हमें
मुस्कुराने की देते  अदा
घिरे रहते कांटों के बीच
मगर  खिलते रहते सदा
कभी जमी पर रौंदे जाते
कभी  दुल्हन  के जुड़े में  इतराते
कभी  प्रभु माथे शोभा  बड़ाते 
कभी शहिदों की चीता पर
गड़ते गौरव की कथा
मेरे अंगना सदा फूल बरसे
'मनु' मन सुमन-सुमन हो ज़ाये
फूलों  की अदाओ पर
मैं  इतराउ सदा
~~~~~~~> मनीष गौतम "मनु"
०७/०२/२०१६
सुप्रभात मित्रों -
आने वाला 'पल' और 'कल' मंगलमयी हो ...


"मुई", छुईमुई -

'मुई'    थी    पहले      छुईमुई    सी  ।
अब   बन    गईं    है       ज़िन्दादिल ॥

कदम- दर- कदम  यूँ  रफ्तार  बड़ी  ।
धरती  से  उड़   छू   लिया    अम्बर ॥

वक्त    के    थपेड़ों   ने  उसे  बदला  ।
करती चकित अब  करतब दिखाकर ॥

मृगनयनी,  मृगतृष्णा,  मृगमरीचिका ।
कोमलता,  कोमलाॅगी,   प्रियदर्शिनी ॥

नामों   की   खटिया  खड़ी  कर  दी ।
अपने  अभिनव  जलवे   दिखा  कर ॥

सजा-संवार रही   अब सारी दुनिया ।
पुरूषों के कंधों से  कंधा मिला कर ॥

नारी तुम अबला नहीं अब सबला हो ।
आँखों  से आँख मिला परिचय दिया  ॥

दुनिया  से  लोहा  मंगवा  ही   लिया ।
बहु   आयामों  के  जौहर  दिखा कर ॥

"मुई"   छुईमुई   अब  ओजस्वी  हुई ।
घर   के   पर्दे    से   बाहर  आ   कर ॥

हे नारी तुम व्यर्थ नहीं ।
        तुम बिन दुनिया का अर्थ नहीं ॥

      ~~~~~>मनीष गौतम "मनु "
दिनांक ०१/०९/२०१६