गुरुवार, 7 मई 2015

अजब-गजब_


क्या आपने कभी देखा है, नारी शरीर के आकार का फूल 

हिमालय के  घनें जंगलें में मिलता है ऐसा पेड़
जिसके फूल नारी आकार में होते है ! ये फूल श्रीलंका में लियाथाबरा माला नाम से जाना जाता है, जिसकी 10 प्रजातियां है। वहीं, थाईलैंड में इस फूल के पौधे को नारीपोल कहा जाता है।2 दशकों यानी 20 साल में खिलने वाले इस फूल ने लोगों को पिछले दिनों हैरान कर दिया। इस फूल का आकार नारी के शरीर के आकार  में दिखा |

नारी शरीर के आकार में दिखने वाले इस फूल को लेकर खूब विवाद भी हुआ। इसे हकीकत नहीं मानने वालों का कहना है कि ये फूल किसी कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से बनाया गया है, जबकि इस हकीकत को मनाने वाले इसे सबसे ज्यादा दुर्लभ किस्म का फूल बताते हैं।

ऑर्किडासिये परिवार का ये फूल हाबेनरिया प्रजाति का है। हाबेनरिया की सभी प्रजातियों के फूल ट्यूबर युक्त स्थलीय ऑर्किड होते हैं।

हिमालय के इन घने जंगलों में मिलता है ऐसा पेड़ जिसके फूल होते हैं नारी के आकार के, देखिये ये अनोखी तसवीरें http://goo.gl/5ieZlc

http://goo.gl/vWcwD7 पर !

Rajasthan Patrika News Narilatha Flowers
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शुभ * संध्या मित्रों_
अाने वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो__ |

बुधवार, 6 मई 2015

चिंतन- मंथन_


एक नौजवान
झगड़ रहा है | अपनें माता-पिता से शायद उसके माता- पिता नें कोई अपराध किया हो वह कह रहा है | मुझे  जन्म  ही क्यों दिया  ? अगर दिया तो नौजवाँ ही क्यों किया ? गलादबा देना था पैदा होते ही ?

वह नौजवान अपनी  सारी मर्यादा लांध चिल्ला- चिल्ला कर गालीयाँ दे रहा है ! उसने अपनें कमरे से अहिंसा वादी गांधी जी की किताब, कार्ल मार्क्स  की  किताब, अर्थशास्त्र , समाज शास्त्र, राजनैतिक शास्त्र न जानें कितनें और शास्त्र की किताबें और प्रमाण पत्र,  कुछ कागज  जो अब उसके लिए निरर्थक  हैं  | बाहर निकाल लाया जो अब  जलने जा रहे हैं |

तमतमाये चेहरे और लरजते हाथों  से उसने आग लगा दी | दहकती लपटों में सारे  सिद्धान्त जलते देख वह प्रशन्न है |  जो इसे भद्र मनुष्य बनाने की शिक्षा देते हैं  क्योंकि वो शिक्षा है | ऐसी शिक्षा जिसके बल पर वह अपना और अपनें परिवार के  लिए दो वक्त की रोटी  न  ला सके  | क्योंकि वह अब  पढ़ा-लिखा बेरोजगार है |

अब  प्रश्न कि पढ़ा-लिखा कर उसके माता-पिता ने  आपराध किया है या आज की शिक्षा नीति को और प्रक्रियाओं को बदलनें की आवश्यकता है |

फंडा  की -  हमें ऐसी शिक्षा लेनी चाहीए जिसमें डिग्री भले न हो पर  खुद का व्यवसाय करनें का ज्ञान हो |

शुभ संध्या * मित्रों
आनें वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो……!

मंगलवार, 5 मई 2015

हे.....! मनमोहन .. ..,


पनघट पे चलो श्याम आज पनीया भरन
तोसे लागी   लगन मन कहीं हो न मगन
पनघट पे चलो श्याम आज पनीया भरन
कभी फोड़ी मटकी कभी करो  ठिठौली
अब बस भी करो  हे मेरे प्यारे मनमोहन
ये मुझे रास न आये  तेरा तुपके से मिलन
पनघट पे चलो श्याम आज पनीया भरन
हे कृष्ण तोसे मिलन की मेरी   मृगतृष्णा
कब   होगी  दुर बतओ मेरे मन की तृष्णा
हे कृष्ण मेरे मन की मिटा दो सारी तृष्णा
मेरे प्यारे मोहन और न सताओ मनमोहन
पनघट पे चलो श्याम आज पनीया भरन .
~~~~~~> मनीष गौतम "मनु"
शुभ* संथ्या मित्रों_

आने वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो....

सोमवार, 4 मई 2015

वो गाँव....

अब मुझे मेरा वो गाँव बहुत याद आता है बरगद कीवह  धनी  छाँव -वो चरती,/फिरती गउँवें वो  चहचहाती सुबह वो  गोधुली/रंभाती शाम न आदमीयों  भीड़  न ऊँचे  मकानों की कश्मकस आस/पास का वो खुला वातावरण बहुत याद आता है

जहाँ प्रेम की गंगा बहती थी रिश्तों में मधुरता होती थी हर गली मुहबोले  दादा/दादी ,नाना/नानी ,मामा/मामी,काका/काकी, भैया/भाबी, सखा /सहेली  से ठिठौली तो कभी मन से बातें  करना  अब वो रिश्तों का तानाबाना बहुत याद  आता है

वो हॉट बाजार परचून की दुकान स्कूल की घंटी
सुन पिठ पर बस्ता लादे स्कूल दौड़ कर पहुँचना
कभी पेट दर्द का बहाना बना के घर में ही रूकना मौका देख गली में पहुँच गिल्ली डंडा, कंचे लुका छिपी का वो खेल खेलना बहुत याद आता है

वो शादी/बारात में बैलगाड़ी पर बैठ कर जाना  पंगत में बैठ कर भोजन करना  तीज त्यौहारों  के आने पर बेहद खुश होना बनें  पकवानों पर आँख गड़ाये रखना  मौका मिलते ही सफाचट कर देना  और  माँ की डाँट खाना  अब बहुत याद अाता है

अब न वो जमाना रहा न ही वो बातें  अब आज  आधुनिकता से जिन्दगी बदरंग हो गई आगे बड़ने की दौड़ में  बहुत सी बातें /परंपरायें पिछे छूट गई
अब बची है तो वो  बीतीं यादें  बस उन्हीं   यादों को  याद कर-;करके  मन  मायुस सा हो जाता है
अब मुझे मेरा वो गाँव बहुत याद आता है....!!!
~~~~~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

सुप्रभात मित्रों
आने वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो....!!

रविवार, 3 मई 2015

सुप्रभात_


भोर हुई कब की मुर्गे ने भी बाँग लगाई..!
सुरज की लालीमा छाई आँसमा पर..!
मित्रो अब तो छोड़ो रजाई......!!

(((((((((( सु-प्रभात )))))))))
******मित्रवर********
आनें वाला "पल"  और  "कल" मंगलमय हो._

दिल-ए-अफसाना ~


जो दूरी थी /वो दुरीयाँ नहीं हैं
जो दूरीयाँ थी/ वो अधुरी नहीं हैं
जो अधुरी थी/ वो पूरी नहीं हैं
जो पूरी  थी/ वो चाहत नहीं हैं
जो चाहत थी / वो कशिश नहीं हैं
जो  कशिश थी/ वो  बयान नहीं हैं
~~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

शुभ * संध्या मित्रों
आने वाला "पल" और "कल" मंगलमय  हो……

शुक्रवार, 1 मई 2015

नमन

शान्ति…

जिवन में शान्ति के लिए ..…
योग/ध्यान/आचरण/ और सत् कर्म अब कहाँ ?
ये बातें तो अब तस्विर  में ही दिखाई देती है ..? चलिए मन की शान्ति  के लिए तस्विर ही सही..?

सुप्रभात मित्रों..
आने वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो...